आज अभी लखनऊ में है बाहर का मौसम बहुत खराब कह सकते हो जो बाहर कही से आ रहे है या जा रहे है ।
वही जो लोग अपने घर में बैठे है उनके लिए अभी आ मौसम हाथ में चाय का प्याला लिए बहुत सुहावना लग सकता है ।
जैसे अभी के मौसम के साथ हर चीज के दो या चार पहलु हो सकते है बस सोचने और परिस्थिति का फर्क रहता है ।
खैर आते है अपने मुद्दे पर कि आज के समय में जब सभी वर्गों और सभी जाति,धर्म के लिए शिक्षा के द्वार लगभग खुले हुए है और आज तो इंटरनेट का जमाना है जहां लोग किसी भी चीज के बारे गूगल बाबा या ChatGPT से २ मिनट वाली मैग्गी से पहले पता कर सकते है । तो क्या आज के समय में भी भगवान अल्लाह गॉड की पहले वाली मान्यता बोले तो शक्ति बची हुई है क्या ?
पहले मैं भी बहुत धार्मिक हुआ करता है जैसा मनुष्य नामक जाति के प्राणी के परिवार में माहौल रहता है उसमें पैदा हुए बच्चे पर भी असर होता ही है जब कोई मुस्लिम परिवार में होगा तो उनके रीति रिवाज और अल्लाह को मानेगा ही सब तक उसकी बुद्धि उस धर्म में बताए गए बातों पर सोचे ना।
हिंदू धर्म में तो सब किसी ने कुछ बता दिया सब लोग मान लेते है , भगवान का नाम आते ही हम लोग अपनी बुद्धि का बटन को स्विच ऑफ कर देते है कि कही ये भगवान का दिया हुआ दिमाग भगवान की उपस्थिति पर ही सवाल ना कर दे ।
जिसके विपरीत भगत सिंह जी ने जेल में बंद अपने अंतिम समय में मैं नास्तिक क्यों हूं पुस्तक लिख कर किया था ।
तथा ई वी रामास्वामी पेरियार ने भगवान से 15 सवाल पूछ कर भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठा दिए ।
फिर आंबेडकर जी द्वारा लिखित riddle in Hinduism/हिंदू धर्म में विषयमता पुस्तक लिख कर सबको बताया गया है ।
और आंबेडकर जी से पहले महात्मा ज्योतिबा फुले ने गुलामगिरी पुस्तक लिख कर हिंदू समाज में आग लगा दी थी ।
तथा महात्मा गौतम बुद्ध ने बौद्ध धम्म दे कर साफ कर दिया कि किसी के द्वारा कही या लिखी गई कोई भी बात मानने से पहले अपनी बुद्धि की कसौटी पर परख ले , चाहे कोई बात मेरे द्वारा ही क्यों ना कही गई हो ।
अगर ऊपर महापुरुषों द्वारा लिखित और बताई गई जानकारी को हर भारतीयों तक पहुंचाया जाए तो आने वाले भविष्य भारत का उज्ज्वल ही होगा ।
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